मुझे कुछ कहना है

kuchh apni baaten, kuchh unki.....

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Sanjeet Mishra

Deputy Chief Sub Editor/ Web Co-Ordinator
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दिल का टूटना जरूरी है…

Posted On: 15 Feb, 2013  
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मस्ती मालगाड़ी में

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Kya kahen

Posted On: 23 Jan, 2010  
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Others मस्ती मालगाड़ी मेट्रो लाइफ में

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Hello world!

Posted On: 22 Jan, 2010  
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Others में

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

प्यार…………….कहने को तो एक मामूली सा शब्द लगता है, परंतु इसकी सार्थकता इतनी गूढ़ है कि हर किसी की समझ से परे है, और इसकी गहराई का अंदाजा बिना इसमें डूबे आप नहीं लगा सकते प्यार जो एक कोमल एहसास है, जहाँ भावनाओं की ही महत्ता होती है, किसी और चीज की नहीं ,आज का भावनाशून्य, भौतिकतावादी, आधुनिकता , दिखावापन से सराबोर इंसान इनबातों को नहीं समझ सकता. समय के साथ मायने बदले हैं, अब तू नहीं कोई और सही ,और नहीं कोई और सही वाली बात चलन में है, दिल का टूटना भी सेलिब्रेट किया जाता है, हर मौसम का मजा लीजिए, वाली बात चरितार्थ होती है, अच्छी बात है कि गमज़दा रहना ब्रेकअप पर रोना धोना छोड़कर लोगों मे मेचय्ोरिटी आ गई है, आज ब्रेकअप के बाद भी खुद को लोग प्रूव कर पा रहे हैं, हों भी क्यों ना, आज तू,कल वो,परसों कोई और आएगी…जाएगी, टेंशन नहीं लेना, इंज्वाय करो, क्या यही प्यार का वास्तविक स्वरूप है, कहते हैं प्यार एकबार ही होता है, तो मौसम की तरह क्यों कुछ ही दिनों मे बदल जाता है, प्यार तो वह मजबूत डोर है जो विश्वास से पिरोई जाती है, और इसका रंग इतना पक्का होता है जिसके आगे दुनिया के किसी रंग का कोई महत्व नहीं, इसके लिए कोई खास दिन मुकर्रर नही होता हर दिन वेलेन्टाईन डे और हर मंथ फरवरी सा होता है, और दिल का टूटना जुड़ना प्यार के शब्दकोष के बाहर के शब्द हैं, बिल्कुल अर्थहीन, जो टूट जाए वो दिल ही क्या , उसे तो काँच कहते हैं, दिल तो हो बस गुलाब सा जो ताजे हों तो खुशबू दें मुरझा भी जाएँ तो काम आएँ……..दिल का जुड़ना जरूरी है..यह कहना सरासर गलत है कि कुछ हटकर करना है तो दिल का टूटना जरूरी है, क्या जिन्होंने कुछ हटकर किया सबके दिल ही टूटे थे. हटकर करने की ख्वाहिश हो तो दिल जोड़कर भी किया जा सकता है.

के द्वारा: kajal kajal

प्यार................कहने को तो एक मामूली सा शब्द लगता है, परंतु इसकी सार्थकता इतनी गूढ़ है कि हर किसी की समझ से परे है, और इसकी गहराई का अंदाजा बिना इसमें डूबे  आप नहीं लगा सकते प्यार जो एक  कोमल एहसास है, जहाँ भावनाओं की ही महत्ता होती है, किसी और चीज की नहीं ,आज का भावनाशून्य, भौतिकतावादी, आधुनिकता , दिखावापन से सराबोर इंसान इनबातों को नहीं समझ सकता. समय के साथ मायने बदले हैं, अब तू नहीं कोई और सही ,और नहीं कोई और सही वाली बात चलन में है, दिल का टूटना भी सेलिब्रेट  किया जाता है, हर मौसम का मजा लीजिए, वाली बात चरितार्थ होती है, अच्छी बात है कि गमज़दा रहना ब्रेकअप पर रोना धोना छोड़कर लोगों मे मेचय्ोरिटी आ गई है, आज ब्रेकअप के बाद भी खुद  को  लोग प्रूव  कर पा रहे हैं, हों भी क्यों ना, आज तू,कल वो,परसों कोई और आएगी...जाएगी, टेंशन नहीं लेना, इंज्वाय करो,  क्या यही प्यार का वास्तविक स्वरूप है, कहते हैं प्यार एकबार ही होता है, तो मौसम की तरह  क्यों कुछ ही दिनों मे बदल जाता है, प्यार तो वह मजबूत डोर है जो विश्वास से पिरोई जाती है, और इसका रंग इतना पक्का होता है जिसके आगे दुनिया के किसी रंग का कोई महत्व नहीं, इसके लिए कोई खास दिन मुकर्रर नही होता हर दिन वेलेन्टाईन डे और हर मंथ फरवरी सा होता है, और दिल का टूटना जुड़ना प्यार के शब्दकोष के बाहर के शब्द हैं, बिल्कुल अर्थहीन, जो टूट जाए वो दिल ही क्या , उसे तो काँच कहते हैं, दिल तो हो बस गुलाब सा जो  ताजे  हों तो खुशबू दें मुरझा भी जाएँ तो काम आएँ........दिल का जुड़ना जरूरी है..यह कहना सरासर गलत है कि कुछ हटकर करना है तो दिल का टूटना जरूरी है, क्या जिन्होंने कुछ हटकर किया सबके दिल ही टूटे थे. हटकर करने की ख्वाहिश हो तो दिल  जोड़कर भी किया जा सकता है. 

के द्वारा: kajal kajal




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